ब्राह्मण ग्रन्थ का परिचय

ब्राह्मण ग्रन्थ का परिचय

क्या हे ब्राह्मण भाग ?

    मुख्यतः वेद के दो प्रकार हे १ मंत्र रूप और २ ब्राह्मण रूप अतः यह ब्राह्मण भाग भी वेद ही हे। शेष वेद रूप यह ब्राह्मण ग्रन्थ यज्ञ अनुष्ठान आदि का विस्तारसे वर्णन करते हे। कही कही कथाये भी यहाँ प्राप्त होती हे। प्रत्येक वेद की शाखाओ के अनुसार ब्राह्मण ग्रन्थ और आरण्यक ग्रन्थ भिन्न भिन्न होते हे। वह ब्राह्मण ग्रन्थ जैसे ---

Brahaman granth parichay

    ऋग्वेद के दो ब्राह्मण हे १ ऐतरेय और २ कौषीतकि ब्राह्मण। यहाँ पर जो पहला हे ऐतरेय ब्राह्मण वह बहोत ही प्रसिद्ध हे। यहाँ पर आठ (८ ) पंचिका हे और प्रत्येक पंचिका में पांच (५) अद्ध्याय होते हे। इस तरह मिलकर (४०)अद्ध्याय हो जाते हे।  और दूसरे कौषीतकि ब्राह्मण भाग में (३०) अद्ध्याय हे।  

    सामवेद के बहोत सारे ब्राह्मण भाग हे , उनमे ताण्ड्य ब्राह्मण अति प्रसिद्ध भाग हे। इसमें (२५) अद्ध्याय हे , और इसी कारण से इसे पंचविंशब्राह्मण नाम से प्रसिद्ध हे। 

कृष्ण यजुर्वेद में तैत्तिरीयब्राह्मण नामका  ब्राह्मण भाग हे। और शुक्ल यजुर्वेद मे शतपथ नामक ब्राह्मण भाग हे. जो अति प्रसिद्ध हे। यहाँ इसमें (१००) सौ अद्ध्याय हे। 

 अथर्ववेद वेद में गोपथ ब्राह्मण नामक ब्राह्मण  हे। यह भाग दो प्रकार से विभाजित हे , पहले विभाग में पांच(५) अद्ध्याय हे और दूसरे विभाग में छह ( ६) अद्ध्याय हे।  

इसी  तरह ऋग्वेद में ऐतरेय आरण्यक और शांखायन आरण्यक ऐसे दो आरण्यक हे।इसी  वेदों के आरण्यक होते हे। 

 ब्राह्मणग्रन्थपरिचयः 

     वेदो द्विविधो मन्त्ररूपो ब्राह्मणरूपश्चेत्युक्तं तदयं ब्राह्मणभागोऽपि वेद एव । ब्रह्म वेदस्तद्वयाख्या ब्राह्मण इति केचित् । वेदशेषभूता इमे ब्राह्मणग्रन्था यज्ञानुष्ठानस्य विस्तृतं वर्णनं कुर्वन्ति । कतिचन कथा अपि ब्राह्मणेषु प्राप्यन्ते । 
    प्रत्येकवेदशाखानुसारेण ब्राह्मणा आरण्यकग्रन्थाश्च भिन्नाः सन्ति , तत्र ब्राह्मणा यथा -----
 ऋग्वेदस्य ऐतरेयब्राह्मण कौषीतकिब्राह्मणञ्चेति ब्राह्मणद्वयम् । अनयो रैतरेयब्राह्मणमति प्रथितम् । अत्र अष्टौ पश्चिकाः , प्रतिपञ्चिकं पञ्चाध्याया इति मिलित्वा ४० अध्यायाः सन्ति । कौषीतकिब्राह्मणे केवलं त्रिंशदध्यायाः ।
    सामवेदस्य बहवो ब्राह्मणभागाः सन्ति , येषु ताण्ड्यब्राह्मणं प्रसिद्धतरम् ।
अयं ग्रन्थः पञ्चविंशत्यध्यायशाली , अतएव पञ्चविंशब्राह्मण संज्ञयाऽपि प्रसिद्धयति । 
     कृष्णयजुर्वेदस्य तैत्तिरीयब्राह्मणनामा ब्राह्मणभागो विद्यते । शुक्लयजुर्वेदस्य शतपथब्राह्मणं नितान्तप्रसिद्धम् , अत्र शतमध्याया विद्यन्ते । 
    अथर्ववेदस्य गोपथब्राह्मणम् । अत्र खण्डद्वयमेव , प्रथमखण्डे पञ्चाध्यायाः , द्वितीये च षट् । ब्राह्मणग्रन्थेषु सर्वतो नवोऽयं ग्रन्थः कथ्यते ।
      एवमेव ऋग्वेदस्य आरण्यकद्वयम् , ऐतरेयमारण्यकम् शाह्मायनारण्यकञ्च । कृष्णयजुर्वेदस्य तैत्तिरीयमारण्यकम् ।
        सामवेदस्य जैमिनोयशाखायाः जैमिनीयोपनिषद्ब्राह्मणमेव तवलकारायः कमिति नाम्ना प्रसिद्धम् । अस्मिन् साममन्त्राणां शोभना व्याख्या कृता । इयं सामवेदारण्यसंहिता सत्यव्रतसामथमिणा १८७८ ई ० वर्षे मुद्रयित्वा प्रकाशिता । 


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