तर्कभाषा: न्याय-वैशेषिक दर्शन का तार्किक और वैज्ञानिक विवेचन
"तर्क्यन्ते प्रतिपाद्यन्ते इति तर्काः (प्रमाणादयः षोडश पदार्थाः) ते भाष्यन्ते अनया इति तर्कभाषा।" अर्थात् वह भाषा या ग्रंथ जिसके माध्यम से प्रमाण आदि 16 पदार्थों का प्रतिपादन किया जाए, वह 'तर्कभाषा' है।
1. मंगलाचरण और ग्रंथ का उद्देश्य
वस्तुनिर्देशात्मक मंगलाचरण (Shloka)
बालोऽपि यो न्यायनये प्रवेशम्, अल्पेन वाञ्छत्यलसः श्रुतेन।
संक्षिप्तयुक्त्यन्विततर्कभाषा, प्रकाश्यते तस्य कृते मयैषा॥
2. न्याय दर्शन के 16 पदार्थ (The 16 Categories)
प्रमाण, 2. प्रमेय, 3. संशय, 4. प्रयोजन, 5. दृष्टान्त, 6. सिद्धान्त, 7. अवयव, 8. तर्क, 9. निर्णय, 10. वाद, 11. जल्प, 12. वितण्डा, 13. हेत्वाभास, 14. छल, 15. जाति, 16. निग्रहस्थान।
उद्देश: नाम मात्र से वस्तु का कथन। लक्षण: उस वस्तु के असाधारण धर्म का वर्णन। परीक्षा: यह जाँचना कि लक्षण सही है या नहीं।
3. ज्ञान की मीमांसा: प्रमाण, प्रमा और करण
प्रमा और प्रमाण
प्रमाण: 'प्रमाकरणं प्रमाणं' - प्रमा (यथार्थ ज्ञान) के साधन को प्रमाण कहते हैं।
प्रमा: 'यथार्थानुभवः प्रमा' - वस्तु जैसी है, उसे वैसा ही अनुभव करना प्रमा है। इसमें संशय, विपर्यय और तर्क शामिल नहीं होते।
कारण और कार्य (Causality)
“यस्य कार्यात् पूर्वभावो नियतोऽनन्यथासिद्धश्च तत्कारणम्” अर्थात् जो कार्य से पूर्व निश्चित रूप से विद्यमान हो और जो अनावश्यक (अन्यथासिद्ध) न हो, वह कारण है।
समवायिकारण: जिसमें कार्य समवाय संबंध से उत्पन्न होता है (जैसे मिट्टी घड़े का, तंतु कपड़े का)। असमवायिकारण: जो समवायि कारण में रहकर कार्य में सहायता करे (जैसे तंतुओं का संयोग)। निमित्तकारण: जो इन दोनों से भिन्न हो (जैसे जुलाहा या कुम्हार)।
4. प्रत्यक्ष प्रमाण (Perception)
"साक्षात्कारिप्रमाकरणं प्रत्यक्षम्"
संयोग: आँख का घड़े से मिलना। संयुक्तसमवाय: घड़े के रूप (रंग) को देखना। संयुक्तसमवेतसमवाय: रूप की जाति (रूपत्व) का ज्ञान। समवाय: कान से शब्द सुनना (कान का छिद्र आकाश है, शब्द उसका गुण)। समवेतसमवाय: शब्द की जाति (शब्दत्व) का ज्ञान। विशेषण-विशेष्यभाव: अभाव का ज्ञान (जैसे भूमि पर घड़ा नहीं है)।
5. अनुमान प्रमाण (Inference)
"लिङ्गपरामर्शोऽनुमानम्"
स्वार्थानुमान: अपने स्वयं के संशय को दूर करने के लिए किया गया मानसिक अनुमान। परार्थानुमान: दूसरों को समझाने के लिए प्रयुक्त पाँच अवयवों वाला तर्क।
प्रतिज्ञा: पर्वत अग्निमान है। हेतु: क्योंकि वहाँ धुआँ है। उदाहरण: जहाँ धुआँ होता है, वहाँ आग होती है (जैसे रसोई)। उपनय: इस पर्वत पर वैसा ही धुआँ है जो आग से व्याप्त है। निगमन: इसलिए यह पर्वत अग्निमान है।
6. हेत्वाभास: तार्किक दोष (Logical Fallacies)
असिद्ध: जिसका आधार ही सिद्ध न हो (जैसे 'आकाश कमल सुगंधित है')। विरुद्ध: जो साध्य के विपरीत हो। अनैकान्तिक (सव्यभिचार): जो भटक जाए (जैसे 'सब कुछ अनित्य है क्योंकि वह प्रमेय है')। प्रकरणसम (सत्प्रतिपक्ष): जिसके विरुद्ध वैसा ही दूसरा तर्क खड़ा हो जाए। कालात्ययापदिष्ट (बाधित): जो प्रत्यक्ष प्रमाण से ही झूठा सिद्ध हो जाए (जैसे 'अग्नि शीतल है')।
7. उपमान और शब्द प्रमाण
उपमान: 'अतिदेशवाक्यार्थस्मरणसहकृतं सादृश्यज्ञानम्'। किसी प्रसिद्ध वस्तु की समानता के आधार पर अज्ञात वस्तु को पहचानना (जैसे गाय जैसी नीलगाय)।
शब्द: 'आप्तवाक्यं शब्दः'। जो यथार्थ वक्ता है, उसके वचन शब्द प्रमाण हैं। वाक्य के लिए आकांक्षा, योग्यता और सन्निधि का होना अनिवार्य है।
8. प्रमेय: ज्ञान के विषय (12 Prameyas)
आत्मा, 2. शरीर, 3. इन्द्रिय, 4. अर्थ, 5. बुद्धि, 6. मन, 7. प्रवृत्ति, 8. दोष, 9. प्रेत्यभाव (पुनर्जन्म), 10. फल, 11. दुःख, 12. अपवर्ग (मोक्ष)।
आत्मा (The Soul)
"आत्मा विभुर्नित्यश्च"
9. द्रव्यों का वैज्ञानिक विवेचन (The 9 Substances)
पृथिवी: गन्धयुक्त। नित्य (परमाणु) और अनित्य (कार्य)। जल: शीत स्पर्शयुक्त। तेज: उष्ण स्पर्शयुक्त (इसमें सुवर्ण/सोना भी शामिल है)। वायु: रूपहीन किंतु स्पर्शयुक्त। आकाश: शब्द गुण वाला, एक और नित्य। काल, दिक्, आत्मा, मन।
10. गुण, कर्म और अभाव
गुण: 24 गुण माने गए हैं (रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, बुद्धि, सुख, दुःख आदि)।
कर्म: उत्क्षेपण (ऊपर), अपक्षेपण (नीचे), आकुञ्चन, प्रसारण, गमन।
अभाव: किसी वस्तु का न होना। यह चार प्रकार का है: प्रागभाव, प्रध्वंसाभाव, अत्यन्ताभाव और अन्योन्याभाव।
11. मोक्ष का स्वरूप: अपवर्ग
"दुःखस्यान्तिकी निवृत्तिः अपवर्गः" 21 प्रकार के दुःखों (शरीर, 6 इन्द्रियाँ, 6 विषय, 6 बुद्धि, सुख और दुःख) से पूर्ण छुटकारा ही मोक्ष है।
12. मीमांसा और अन्य दर्शनों का संक्षिप्त परिचय
पूर्व मीमांसा: कर्मकाण्ड और यज्ञ का विवेचन। उत्तर मीमांसा (वेदान्त): ब्रह्म का विचार। लौगाक्षिभास्कर कृत 'अर्थसंग्रह' मीमांसा का महत्वपूर्ण प्रकरण ग्रंथ है।
निष्कर्ष
UGC - net सम्पुर्ण संस्कृत सामग्री कोड - २५ पुरा सिलेबस
(क) प्रमुख भारतीय दर्शनों का सामान्य परिचय :-
योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा के संदर्भ में )
(ख) दर्शन-साहित्य का विशिष्ट अध्ययन :-
दर्शन साहित्य के अभ्यास प्रश्न :-